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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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अबरार अहमद काशिफ़

ग़ज़ल 4

 

नज़्म 1

 

अशआर 3

आख़िरी लम्हात में क्या सोचने लगते हो तुम

जीत के नज़दीक कर हार जाया मत करो

परेशानी अगर है तो परेशानी का हल भी है

परेशाँ-हाल रहने से परेशानी नहीं जाती

वस्ल के बाद भी पूरी नहीं होती ख़्वाहिश

और कुछ है जो ये नादीदा बदन चाहता है

 

वीडियो 8

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