आबिद मलिक
ग़ज़ल 12
अशआर 10
बड़े सुकून से अफ़्सुर्दगी में रहता हूँ
मैं अपने सामने वाली गली में रहता हूँ
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
हज़ार ताने सुनेगा ख़जिल नहीं होगा
ये वो हुजूम है जो मुश्तइल नहीं होगा
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
फ़लक से कैसे मिरा ग़म दिखाई देगा तुझे
कभी ज़मीन पे आ और ज़मीं से देख मुझे
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
ज़ख़्म और पेड़ ने इक साथ दुआ माँगी है
देखिए पहले यहाँ कौन हरा होता है
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए
पूछता फिरता हूँ मैं अपना पता जंगल से
आख़िरी बार दरख़्तों ने मुझे देखा था
- अपने फ़ेवरेट में शामिल कीजिए
-
शेयर कीजिए
- ग़ज़ल देखिए