Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता

मिर्ज़ा ग़ालिब

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता

मिर्ज़ा ग़ालिब

MORE BYमिर्ज़ा ग़ालिब

    रोचक तथ्य

    Film: Mirza Ghalib (1954)

    ये थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता

    अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता

    तिरे वा'दे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना

    कि ख़ुशी से मर जाते अगर ए'तिबार होता

    तिरी नाज़ुकी से जाना कि बँधा था अहद बोदा

    कभी तू तोड़ सकता अगर उस्तुवार होता

    कोई मेरे दिल से पूछे तिरे तीर-ए-नीम-कश को

    ये ख़लिश कहाँ से होती जो जिगर के पार होता

    ये कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त नासेह

    कोई चारासाज़ होता कोई ग़म-गुसार होता

    रग-ए-संग से टपकता वो लहू कि फिर थमता

    जिसे ग़म समझ रहे हो ये अगर शरार होता

    ग़म अगरचे जाँ-गुसिल है कहाँ बचें कि दिल है

    ग़म-ए-इश्क़ गर होता ग़म-ए-रोज़गार होता

    कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है

    मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता

    हुए मर के हम जो रुस्वा हुए क्यूँ ग़र्क़-ए-दरिया

    कभी जनाज़ा उठता कहीं मज़ार होता

    उसे कौन देख सकता कि यगाना है वो यकता

    जो दुई की बू भी होती तो कहीं दो-चार होता

    ये मसाईल-ए-तसव्वुफ़ ये तिरा बयान 'ग़ालिब'

    तुझे हम वली समझते जो बादा-ख़्वार होता

    वीडियो
    This video is playing from YouTube

    Videos
    This video is playing from YouTube

    फ़रीहा परवेज़

    फ़रीहा परवेज़

    हबीब वली मोहम्मद

    हबीब वली मोहम्मद

    अज्ञात

    अज्ञात

    चित्रा सिंह

    चित्रा सिंह

    अज्ञात

    अज्ञात

    इक़बाल बानो

    इक़बाल बानो

    उस्ताद अमानत अली ख़ान

    उस्ताद अमानत अली ख़ान

    भारती विश्वनाथन

    भारती विश्वनाथन

    बेगम अख़्तर

    बेगम अख़्तर

    RECITATIONS

    नोमान शौक़

    नोमान शौक़,

    शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

    शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी,

    नोमान शौक़

    ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता नोमान शौक़

    शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

    ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

    स्रोत :
    Suggested Book
    Diwan-e-Ghalib book cover

    Diwan-e-Ghalib

    Publication: Rekhta Publications
    Buy This Book

    संबंधित टैग

    यह पाठ नीचे दिए गये संग्रह में भी शामिल है

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY
    बोलिए