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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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जला के मिशअल-ए-जाँ हम जुनूँ-सिफ़ात चले

मजरूह सुल्तानपुरी

जला के मिशअल-ए-जाँ हम जुनूँ-सिफ़ात चले

मजरूह सुल्तानपुरी

जला के मिशअल-ए-जाँ हम जुनूँ-सिफ़ात चले

जो घर को आग लगाए हमारे साथ चले

दयार-ए-शाम नहीं मंज़िल-ए-सहर भी नहीं

अजब नगर है यहाँ दिन चले रात चले

हमारे लब सही वो दहान-ए-ज़ख़्म सही

वहीं पहुँचती है यारो कहीं से बात चले

सुतून-ए-दार पे रखते चलो सरों के चराग़

जहाँ तलक ये सितम की सियाह रात चले

हुआ असीर कोई हम-नवा तो दूर तलक

ब-पास-ए-तर्ज़-ए-नवा हम भी साथ साथ चले

बचा के लाए हम यार फिर भी नक़्द-ए-वफ़ा

अगरचे लुटते रहे रहज़नों के हाथ चले

फिर आई फ़स्ल कि मानिंद बर्ग-ए-आवारा

हमारे नाम गुलों के मुरासलात चले

क़तार-ए-शीशा है या कारवान-ए-हम-सफ़राँ

ख़िराम-ए-जाम है या जैसे काएनात चले

भुला ही बैठे जब अहल-ए-हरम तो 'मजरूह'

बग़ल में हम भी लिए इक सनम का हाथ चले

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मजरूह सुल्तानपुरी

मजरूह सुल्तानपुरी

मजरूह सुल्तानपुरी

मजरूह सुल्तानपुरी

मजरूह सुल्तानपुरी

मजरूह सुल्तानपुरी

मजरूह सुल्तानपुरी

मजरूह सुल्तानपुरी

RECITATIONS

नोमान शौक़

नोमान शौक़,

मजरूह सुल्तानपुरी

मजरूह सुल्तानपुरी,

मजरूह सुल्तानपुरी

मजरूह सुल्तानपुरी,

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नोमान शौक़

जला के मिशअल-ए-जाँ हम जुनूँ-सिफ़ात चले नोमान शौक़

मजरूह सुल्तानपुरी

जला के मिशअल-ए-जाँ हम जुनूँ-सिफ़ात चले मजरूह सुल्तानपुरी

मजरूह सुल्तानपुरी

जला के मिशअल-ए-जाँ हम जुनूँ-सिफ़ात चले मजरूह सुल्तानपुरी

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