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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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करूँ न याद मगर किस तरह भुलाऊँ उसे

अहमद फ़राज़

करूँ न याद मगर किस तरह भुलाऊँ उसे

अहमद फ़राज़

करूँ याद मगर किस तरह भुलाऊँ उसे

ग़ज़ल बहाना करूँ और गुनगुनाऊँ उसे

वो ख़ार ख़ार है शाख़-ए-गुलाब की मानिंद

मैं ज़ख़्म ज़ख़्म हूँ फिर भी गले लगाऊँ उसे

ये लोग तज़्किरे करते हैं अपने लोगों के

मैं कैसे बात करूँ अब कहाँ से लाऊँ उसे

मगर वो ज़ूद-फ़रामोश ज़ूद-रंज भी है

कि रूठ जाए अगर याद कुछ दिलाऊँ उसे

वही जो दौलत-ए-दिल है वही जो राहत-ए-जाँ

तुम्हारी बात पे नासेहो गँवाऊँ उसे

जो हम-सफ़र सर-ए-मंज़िल बिछड़ रहा है 'फ़राज़'

अजब नहीं है अगर याद भी आऊँ उसे

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ग़ुलाम अली

ग़ुलाम अली

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Fahad Husain

Fahad Husain,

नोमान शौक़

नोमान शौक़,

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Fahad Husain

करूँ न याद मगर किस तरह भुलाऊँ उसे Fahad Husain

नोमान शौक़

करूँ न याद मगर किस तरह भुलाऊँ उसे नोमान शौक़

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