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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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सर्द रातों की रिदा डूबती नींदों की थकन

सरमद सहबाई

सर्द रातों की रिदा डूबती नींदों की थकन

सरमद सहबाई

MORE BYसरमद सहबाई

    सर्द रातों की रिदा डूबती नींदों की थकन

    चेहरा-ए-सुब्ह से टूटी मिरे ख़्वाबों की थकन

    आँख में पिघले हुए साँवले चेहरों की नमी

    ध्यान में गूँजती ख़ामोश सदाओं की थकन

    एक साया भी उभरा मिरी गलियों के क़रीब

    रास्ते खा गए पथराई निगाहों की थकन

    शल हुए जाते हैं हर पेड़ के सूखे बाज़ू

    ढल गई ज़र्द ख़िज़ाओं में बहारों की थकन

    बाग़ में फैलती तन्हाई के बोझल पाँव

    गिरते पत्तों की थकन गर्म दोपहरों की थकन

    दिल पे इक बार सा ख़ामोश तमन्नाओं की धूल

    होंट पर जमती हुई अन-कही बातों की थकन

    याद के दश्त में सहमे हुए आहू की तरह

    घूमती फिरती रही है मिरी सोचों की थकन

    इक तिरे जिस्म की सज-धज में सिमट आई है

    जोश-ए-तख़्लीक़ से घबराए ख़ुदाओं की थकन

    आँख में आते ज़मानों के ख़लाओं का सुकूत

    ज़ेहन में बीती हुई हाँपती सदियों की थकन

    मेरे आ'माल में चीख़े है बदी की वहशत

    मेरी नीयत में है ना-कर्दा गुनाहों की थकन

    वक़्त का बोझ लिए फिरता रहा हूँ 'सरमद'

    जिस्म से लिपटी है दम तोड़ते लम्हों की थकन

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