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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

सलीम शाहिद

अशआर 2

हर बज़्म क्यूँ नुमाइश-ए-ज़ख़्म-ए-हुनर बने

हर भेद अपने दोस्तों के दरमियाँ खोल

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हर लहज़ा उस के पाँव की आहट पे कान रख

दरवाज़े तक जो आया है अंदर भी आएगा

 

ग़ज़ल 37

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