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मुस्तनसिर हुसैन तारड़
कहानी 11
उद्धरण 2

मुहब्बत कितनी ख़ौफ़नाक चीज़ होती है। तुम एक अजनबी को अपना मालिक बना कर तमाम-तर ताक़त उसके हाथ में दे देते हो। दुख देने की, ख़ुशी देने की, उदास करने की ताक़त।
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कोई भी अमल जब ट्रायल ऐंड एरर के मरहले से गुज़र कर ठोस तजुर्बे की सूरत इख़्तियार कर जाता है तो फिर गाड़े अंधेरे में भी उसे कमाल-ए-ख़ुश-उस्लूबी से सर-अंजाम दिया जा सकता है।
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