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इब्न-ए-सफ़ी

1928 - 1980 | कराची, पाकिस्तान

उर्दू के सबसे बड़े जासूसी उपन्यासकार जो पहले ' असरार नारवी ' के नाम से शायरी करते थे।

उर्दू के सबसे बड़े जासूसी उपन्यासकार जो पहले ' असरार नारवी ' के नाम से शायरी करते थे।

इब्न-ए-सफ़ी

अशआर 11

चाँद का हुस्न भी ज़मीन से है

चाँद पर चाँदनी नहीं होती

लिखने को लिख रहे हैं ग़ज़ब की कहानियाँ

लिक्खी जा सकी मगर अपनी ही दास्ताँ

हुस्न बना जब बहती गंगा

इश्क़ हुआ काग़ज़ की नाव

बिल-आख़िर थक हार के यारो हम ने भी तस्लीम किया

अपनी ज़ात से इश्क़ है सच्चा बाक़ी सब अफ़्साने हैं

ज़मीन की कोख ही ज़ख़्मी नहीं अंधेरों से

है आसमाँ के भी सीने पे आफ़्ताब का ज़ख़्म

ग़ज़ल 9

नज़्म 1

 

पुस्तकें 50

वीडियो 3

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हबीब वली मोहम्मद

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ऑडियो 9

आज की रात कटेगी क्यूँ कर साज़ न जाम न तो मेहमान

कुछ तो तअल्लुक़ कुछ तो लगाओ

कुछ भी तो अपने पास नहीं जुज़-मता-ए-दिल

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