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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

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शहज़ाद अहमद

1932 - 2012 | लाहौर, पाकिस्तान

नई ग़ज़ल के प्रमुखतम पाकिस्तानी शायरों में विख्यात

नई ग़ज़ल के प्रमुखतम पाकिस्तानी शायरों में विख्यात

शहज़ाद अहमद

ग़ज़ल 98

नज़्म 19

अशआर 197

छोड़ने मैं नहीं जाता उसे दरवाज़े तक

लौट आता हूँ कि अब कौन उसे जाता देखे

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ये समझ के माना है सच तुम्हारी बातों को

इतने ख़ूब-सूरत लब झूट कैसे बोलेंगे

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गुज़रने ही दी वो रात मैं ने

घड़ी पर रख दिया था हाथ मैं ने

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हज़ार चेहरे हैं मौजूद आदमी ग़ाएब

ये किस ख़राबे में दुनिया ने ला के छोड़ दिया

हौसला है तो सफ़ीनों के अलम लहराओ

बहते दरिया तो चलेंगे इसी रफ़्तार के साथ

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पुस्तकें 28

चित्र शायरी 6

 

वीडियो 14

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