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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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नुसरत ज़ेहरा

ग़ज़ल 6

अशआर 3

कश्तियाँ जल गई हैं सब शायद

इक धुआँ है किसी की आहों में

तिरी जबीं पे जो इक बार जगमगाया था

वो इक सितारा मेरे लम्हा-ए-विसाल में है

तू भी रह रह के मुझ को याद करे

मेरा भी दिल तिरी पनाह में है

 

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