इफ्तिखार शफ़ी
ग़ज़ल 2
अशआर 3
सुना है ऐसे भी होते हैं लोग दुनिया में
कि जिन से मिलिए तो तन्हाई ख़त्म होती है
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हिजरत की घड़ी हम ने तिरे ख़त के अलावा
बोसीदा किताबों को भी सामान में रक्खा
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था कोई वहाँ जो है यहाँ भी है वहाँ भी
जो हूँ मैं यहाँ हूँ मैं वहाँ कोई नहीं था
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