अज़हर नवाज़
ग़ज़ल 27
अशआर 7
ख़ूबसूरत है सिर्फ़ बाहर से
ये इमारत भी आदमी सी है
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कोई किरदार अदा करता है क़ीमत इस की
जब कहानी को नया मोड़ दिया जाता है
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मोहतरम कह के मुझे उस ने पशेमान किया
कोई पहलू न मिला जब मिरी रुस्वाई का
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मुझ को हर सम्त ले के जाता है
एक इम्कान तेरे होने का
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वीडियो 17
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